Hazrat Ibrahim ibn adham हजरत इब्राहिम इब्न अधम(King of Balkh)

हजरत इब्राहिम बिन अधम का जीवन परिचय

इब्राहिम बिन अधम को इब्राहिम बाल्खी (إبراهيم بن أدهم) भी कहा जाता है; इनका जन्म( 718-782) में हुआ प्रारंभिक तपस्वी सूफी संतों में सबसे प्रमुख में से एक है।

हजरत इब्राहिम बिन अधम के पिता का नाम राजा अधम था और वह बग़दाद शहर के राजा थे ।
अपने पिता के प्रभाव में रहकर हजरत इब्राहिम ने सभी प्रकार की धार्मिक ज्ञान की प्राप्ति की और इल्म में विशेष रुचि रखी। उन्होंने बहुत सारी किताबों और सन्तों से अपनी धार्मिक ज्ञान की वृद्धि की और उन्होंने नेता बनने की इच्छा प्रकट की।

हजरत इब्राहिम बिन अधम के जिंदगी में एक बदलाव आया जब वह खुद को अपनी आत्मसात की खोज में पाया। उन्होंने अपने आसपास के लोगों की संगति करके नया धर्म और धार्मिक सत्य के प्रति आकर्षित हुए। यह प्रक्रिया उन्हें अपनी मातृभूमि से दूर ले गयी।



   
                
हजरत इब्राहिम बिन अधम का मुस्लिम धर्म की ओर सफर

हजरत इब्राहिम बिन अधम का मुस्लिम सफर उनके जीवन की महत्वपूर्ण और प्रेरक भूमिका है। उनका मुस्लिम सफर एक गहरे आंतरिक परिवर्तन की कथा है, जिसमें वे अपने पूर्व धर्म से अलग होकर इस्लाम में प्रवेश करते हैं।

इब्राहिम बिन अधम का मुस्लिम सफर उनकी आत्मा की तलाश में आरंभ हुआ, जब उन्होंने अपनी आसपास की व्यवस्था और धर्मिकता पर सवाल उठाने शुरू किए। वे अपने आसपास के साधु-संतों, ब्राह्मणों और विद्वानों से धार्मिक ज्ञान की खोज करने लगे। यह सफर उन्हें अलग-अलग धार्मिक संप्रदायों, जैन और बौद्ध धर्म, हिन्दू धर्म, और यहूदी धर्म की ओर ले गया।

हालांकि, इब्राहिम बिन अधम के सभी यात्राएँ उन्हें संतुष्टि नहीं दे सकती थीं। उन्होंने एक सत्य और आत्मीय संवाद की तलाश की, जो उन्हें आत्मा की शांति और प्रकाश दे सके। अंततः, उन्होंने इस्लाम के वाहिद ईश्वर के ज्ञान में प्राप्ति की और मुस्लिम बन गए।

Mosque of hazrat Ibrahim ibn Adham
USA

'' आप जानते हैं कि आपमें कई दोष हैं, फिर भी आप दूसरों में दोष ढूंढने का प्रयास करते हैं।'' hazrat Ibrahim bin adham

किसी ने इब्राहीम बिन अधम से पूछा;  “आप ज़मज़म का पानी क्यों नहीं पीते?  “उन्होंने उत्तर दिया, “यदि मेरे पास एक बाल्टी होती, तो मैं इसे पी लेता।”



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