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Hazrat Ibrahim ibn adham हजरत इब्राहिम इब्न अधम(King of Balkh)

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हजरत इब्राहिम बिन अधम का जीवन परिचय इब्राहिम बिन अधम को इब्राहिम बाल्खी (إبراهيم بن أدهم) भी कहा जाता है; इनका जन्म( 718-782) में हुआ प्रारंभिक तपस्वी सूफी संतों में सबसे प्रमुख में से एक है। हजरत इब्राहिम बिन अधम के पिता का नाम राजा अधम था और वह बग़दाद शहर के राजा थे । अपने पिता के प्रभाव में रहकर हजरत इब्राहिम ने सभी प्रकार की धार्मिक ज्ञान की प्राप्ति की और इल्म में विशेष रुचि रखी। उन्होंने बहुत सारी किताबों और सन्तों से अपनी धार्मिक ज्ञान की वृद्धि की और उन्होंने नेता बनने की इच्छा प्रकट की। हजरत इब्राहिम बिन अधम के जिंदगी में एक बदलाव आया जब वह खुद को अपनी आत्मसात की खोज में पाया। उन्होंने अपने आसपास के लोगों की संगति करके नया धर्म और धार्मिक सत्य के प्रति आकर्षित हुए। यह प्रक्रिया उन्हें अपनी मातृभूमि से दूर ले गयी।                      हजरत इब्राहिम बिन अधम का मुस्लिम धर्म की ओर सफर हजरत इब्राहिम बिन अधम का मुस्लिम सफर उनके जीवन की महत्वपूर्ण और प्रेरक भूमिका है। उनका मुस्लिम सफर एक गहरे आंतरिक परिवर्तन की कथा है, जिसमें वे ...

Bakra eid (eid ul adha)

  बकरी ईद (या ईद-उल-अजहा) एक इस्लामी त्योहार है जो दुनिया भर में मनाया जाता है। यह ईद ईस्लामिक कैलेंडर के ज़हरीरी महीने ज़ुल-हिज्ज़ा के 10वें दिन को मनाई जाती है। यह त्योहार भारत और अन्य देशों में मुस्लिम समुदाय के द्वारा बड़े धूमधाम के साथ मनाया जाता है। ईद-उल-अजहा के दिन मुस्लिम समुदाय भेड़-बकरी की क़ुर्बानी करती हैं। इसका मतलब होता है कि उन्हें ईश्वर के प्रति अपनी भक्ति और निष्ठा का प्रदर्शन करना होता है। यह एक प्राचीन परंपरा है जिसमें एक बकरा, भेड़, या मेंढ़ा की बलि चढ़ाई जाती है और उसका मांस गरीबों और दरिद्रों में बाँटा जाता है। इस दिन कोई अच्छी खान-पान तैयार किया जाता है, लोग एक दूसरे के घर जाते हैं, परिवार और दोस्तों के साथ समय बिताते हैं और एक दूसरे को तोहफ़े भी देते हैं। यह त्योहार ज़रूरतमंद और गरीबों की मदद के लिए भी अच्छा मौका प्रदान करता ह

Musa aur firaon (हजरत मूसा) और फिरऔन

हजरत मूसा के दौर में फिरऔन एक जालिम बादशाह था, जो खुदाई का दावा किया करता था। फिरऔन ने एक बार तमाम जादूगरों को हजरत मुसा को शिकस्त देने की गरज से जमा किया, जिनके मुकाबले में हजरत मूसा तन्हा थे। उन जादूगरों ने फिरऔन की इज्जत की कसमें खाते हुए जादू की लकड़ियों और रस्सियों को फेंका, जो सांप बनकर दौड़ने लगे। तब मूसा ने अपना असा फेंका जो एक बड़ा अजदहा बनकर उन सभी जादू के सांपों को खा गया, जिसे देख सभी जादूगर भी घबरा गए 'इसी तरह हजरत मूसा जब अपनी कौम के साथ मैदाने तीह में जमा हो गए और जब वे भूख और प्यास से परेशान हो गए तो अल्लाह ने उन पर कुदरती गिजा मन्न और सलवा उतारी और मूसा को हुक्म दिया की तुम अपना असा जमीन पर पटको तो उसके टकराने से 12 चश्मे फूट पड़े तो बनी इसराइल के 12 खानदानों ने उससे खुद भी पानी पिया और अपने मवेशियों को भी पानी पिलाया।' जब फिरऔन ने मूसा की बात नहीं मानी बल्कि वो उन पर और उनकी कौम बनी इसराइल पर जुल्मों-सितम करता रहा तो अल्लाह के हुक्म से हजरत मूसा बनी इसराइल के ईमान वाले साथियों को साथ लेकर मिस्र से चले गए जब ये बात फिरऔन को पता चली तो वो भी पीछा करता हुआ आया 'र...