Musa aur firaon (हजरत मूसा) और फिरऔन

हजरत मूसा के दौर में फिरऔन एक जालिम बादशाह था, जो खुदाई का दावा किया करता था। फिरऔन ने एक बार तमाम जादूगरों को हजरत मुसा को शिकस्त देने की गरज से जमा किया, जिनके मुकाबले में हजरत मूसा तन्हा थे। उन जादूगरों ने फिरऔन की इज्जत की कसमें खाते हुए जादू की लकड़ियों और रस्सियों को फेंका, जो सांप बनकर दौड़ने लगे। तब मूसा ने अपना असा फेंका जो एक बड़ा अजदहा बनकर उन सभी जादू के सांपों को खा गया, जिसे देख सभी जादूगर भी घबरा गए 'इसी तरह हजरत मूसा जब अपनी कौम के साथ मैदाने तीह में जमा हो गए और जब वे भूख और प्यास से परेशान हो गए तो अल्लाह ने उन पर कुदरती गिजा मन्न और सलवा उतारी और मूसा को हुक्म दिया की तुम अपना असा जमीन पर पटको तो उसके टकराने से 12 चश्मे फूट पड़े तो बनी इसराइल के 12 खानदानों ने उससे खुद भी पानी पिया और अपने मवेशियों को भी पानी पिलाया।'

जब फिरऔन ने मूसा की बात नहीं मानी बल्कि वो उन पर और उनकी कौम बनी इसराइल पर जुल्मों-सितम करता रहा तो अल्लाह के हुक्म से हजरत मूसा बनी इसराइल के ईमान वाले साथियों को साथ लेकर मिस्र से चले गए जब ये बात फिरऔन को पता चली तो वो भी पीछा करता हुआ आया 'रास्ते में दरिया-ए-नील (मिस्र की एक नदी) था। सभी ने सोचा की इसे किस तरह से पार करें तो हजरत मूसा ने अल्लाह के हुक्म से अपना असा दरिया-ए-नील में जोर से मारा तो दरिया ए नील ने उनके लिए रास्ता बना दिया और वे चलकर दरिया के पार पहुंच गए। इधर जब फिरऔन ने ये माजरा देखा तो पहले तो वो घबरा गया, मगर फिर उसने भी अपने साथियों के साथ दरिया ए नील में बने हुए रास्ते पर चल पड़ा जैसे ही वो बीच में पहुंचा रास्ता बंद हो गया और हर तरफ पानी ही पानी नजर आने लगा। तब फिरआन ने देख लिया की अब वो किसी भी तरह से बच नहीं सकता है तो उसने डूबते हुवे कहा मैने मुसा के खुदा पर अपना ईमान लाया 'मगर इस तरह उसका ईमान लाना भी उसके किसी काम नहीं आया 'यहाँ तक की दरिया ए नील ने भी उसे कुबूल नहीं किया और उसकी लाश को मीन में फेक दिया 'फिरऔन की ममी को मिस्र वालों ने आज भी सुरक्षित रखा है, ताकि जिसे देख कर लोग इबरत हासिल कर सके की झूठी खुदाई का दावा करने वालो का क्या हश्र होता है।

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